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Saturday, March 4, 2017

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (26 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-2


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (26-फरवरी-17, कोलकता समागम, दूसरा दिन)-*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) आज समागम के दूसरे दिन आपने सुबह सेवादल की रैली का रूप देखा और अब आप सत्संग का आनंद ले रहे हैं, अपनी भक्ति का आनंद ले रहे हैं। 
बाबा जी ने हमेशा यही सिखाया -
*_'Spend time to improve yourself but do not waste time to prove it.'_*

*हमें अपना समय अपने आपको सुधारने के लिए जरूर लगाना है, पर ये ना हम सोचें, कि हम लोगों को दिखाएं, देखो जी हम अपने आप को कितना improve कर रहे हैं।*

2) *मीराबाई, भक्त कबीर, प्रहलाद, इन सबके जीवन से आप वाकिफ हैं, उन्होंने सिर्फ भक्ति करी और लोगों को ये कभी नहीं बताया कि मैं ज्ञानवान हूं मैं भक्त हूं।* उनकी भक्ति के कारण ही सब उनके साथ जुड़ते गए और आज तक श्रद्धा से सब उनको याद करते हैं। 

3) दूसरी तरफ रावण जो अभिमानी था, उसको अपनी भक्ति का अभिमान भी था और सिर्फ यही दिखाना चाहता था कि मैं कितना महान हूं। अभी तक हर बरस उसका पुतला जलाते हैं और उसके अभिमान के लिए ही उसको याद किया जाता है।
*अगर हम भक्ति सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि लोग देखें मैं कितना बड़ा भक्त हूं तो वह भक्ति नहीं होती।*

4) आप सब प्रधान जी के जीवन से भी वाकिफ थे कि उन्होंने कितना बरस कोलकाता में लगाया और जगह-जगह जाके इस मिशन का प्रचार किया, तब तो कारें भी नहीं थी मिशन के पास इतनी, कभी ट्रेन पे जाना पड़ा तो वह ट्रेन पर चले गए, बस पे जाना पड़ा तो बस पे चले गए, इतना सरल सा का जीवन था उनका और इसी सरलता के साथ उन्होंने अनेकों को इस मिशन के साथ भी जोड़ा।
निरंकार से यही अरदास है कि *सबके जीवन में सरलता बनी रहे भक्ति बनी रहे और बढ़-चढ़ के इस मिशन का प्रचार आगे से आगे कर पाएं।*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (25 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-1


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (25-फरवरी-17, कोलकता समागम, पहला दिन)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) बाबा जी के साथ North East के अनेकों शहरों और गाँवों में जाने का अक्सर मौका मिलता रहा और आप सब महापुरुषों के दर्शन करके आशीर्वाद लेने का भी मौका मिलता रहा। कोलकता में भी अनेको बार बाबाजी के साथ आए और समागम भी किए, पर *आज इस रूप में पहली बार यहां पे अपनी जमीन पे समागम हो रहा है और आप सब ये सुंदर रूप देख रहे हैं।*

2) शायद 2 या 3 वर्ष पहले जब बाबाजी के साथ इसी ज़मीन पे आने का मौका मिला था तो उसी टाइम शायद इसको खरीदा गया था और बाबाजी ने बड़ी खुशी से फरमाया था कि अब कोलकता में हम अपनी ज़मीन पे समागम कर पाएंगे। *यह सिर्फ और सिर्फ बाबा जी के आशीर्वाद से, बाबा जी की मेहरबानी से, जो आज हम सुंदर दृश्य देख रहे हैं, ये हमें देखने को मिल रहा है। हम बाबा जी के एहसानों का बदला कभी चुका नहीं पाएंगे।*

3) कुछ समय पहले एक बच्चों की किताब में एक कहानी पढ़ने को मिली कि एक बहुत गरीब व्यक्ति था। वो अपनी फरियाद लेके राजा के दरबार में गया और अपना उसने हाल सुनाया। राजा बहुत दयालु था। उसने एलान किया कि इसको 30 सोने के सिक्के रोज़ दिए जाएं। उस व्यक्ति ने राजा के एहसान का शुक्र किया और शुक्र करते-करते अपने घर जाकर अपनी आराम से जिंदगी व्यतीत करने लगा। 
कुछ समय बाद राजा के राज्य में थोड़ी सी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई तो राजा ने ऐलान किया कि अब कुछ देर के लिए दान-पुण्य के सभी काम बंद करने पड़ेंगे। जब उस व्यक्ति को यह पता चला, तो पहले जो राजा का एहसान मानता रहा, पर अब उसकी दी हुई दौलत पे अपना हक समझने लग पड़ा था। तो नाराज़ होके राजा के पास गया और बोलने लगा कि ऐसे कैसे हो सकता है और थोड़ा ऊंचा बोलना शुरू हो गया। तो राजा ने फिर ऐलान किया कि अब इसको कभी 30 सिक्के नहीं दिए जाएंगे। 

4) इंसान की भी हालत कुछ ऐसी है। *प्रभु ने इतना कुछ दिया है हमें, उसका शुक्र करने के बदले हम गिले-शिकवों में पड़ जाते हैं। अगर हमें 10 चीज़ें मिली हैं तो हम उनके लिए शुक्रगुजार नहीं होते बल्कि जो एक चीज नहीं मिली उसके लिए हम प्रभु से गिले-शिकवे करने शुरू हो जाते हैं।*
*_'God Ows us nothing but He Gives us everything.'_*

5) आपने संगत में भी महापुरुषों से सुना-
*_'इक-इक स्वांस इसी का दिया है जो मैं लेता हूं,_*
*_अपना आप जताने को अब और ये क्या एहसान करें'_*
आप महापुरुष सेवा सिमरन सत्संग के हमेशा मौके ढूंढते रहते हैं ताकि हम मानव जाति की सेवा कर पाएं, *हर पल सिमरन करके इस प्रभु को हमेशा याद करते रहें, सत्संग करके इसके गुण-गान गायें, इसका शुक्राना करें, हर पल शुक्राना करें, जितना करें उतना कम है।* यही अरदास है निरंकार किरपा बनाए रखे, *हर इक संत के अंदर शुक्राने का भाव बना रहे, अपनी खुदगर्जी कभी ना आए, मनमुटाव या कोई लालच कभी ना आए।*

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Friday, March 3, 2017

Parvachan of Satguru Mata Savinder Hardev Singh Ji Maharaj (23 February 2017, Guru Puja Diwas, Delhi)



 *सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (23-फरवरी-17, गुरु पूजा दिवस, दिल्ली)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) पिछले 8-9 महीने से हम ज़िक्र कर भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं, बाबाजी के आशीर्वादों का, बाबा जी की शिक्षाओं का, एक अनथक जीवन जो सिर्फ मानवता को समर्पित रहा।अपनी परवाह किए बिना, अपनी भूख प्यास नींद की। 
He wanted to uplift humanity and society through Spirituality.

उन्होंने यही सिखाया *_'नर सेवा ही नारायण पूजा है'_* और यही चाहा कि - 
*_'मानव को मानव हो प्यारा, ईक दूजे का बनें सहारा'_*।

2) आज सुबह भी जाने का मौका मिला, समालखा के पास, 4 गांव जो मिशन ने adopt किए हैं बाबा जी के आशीर्वाद से, सब मिशन की शिक्षाओं का, बाबा जी की शिक्षाओं का, They were very impressed और दिल्ली में भी आपने देखा, हॉस्पिटल भी clean हुआ, *All over India we cleaned 263 Railway Stations.* ये सिर्फ इसलिए हो पा रहा है क्योंकि बाबा जी ने हमको हमेशा यही समझाया कि सब इंसान हमारे अपने हैं, ये सब हमारा परिवार है। सबसे, हमें बाबाजी ने हमें समझाया कि प्यार करना है।

3) कुछ समय पहले भी दासी अवनीत जी की एक बात का जिक्र कर रही थी कि, वो बोल रहे थे कि हम किसी को जानते नहीं है अगर तो हम उसके साथ कैसे प्यार कर सकते हैं। इसका सरल उपाय एक ही है कि हम उसके साथ जुड़ जाएँ जो सारी दुनिया के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका ये सब परिवार है। वो एक निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा, इस निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा और कौन हो सकता है। इसके साथ जुड़े रहेंगे तो सब हमारे अपने ही हमें लगेंगे, सबके लिए हमारे दिल में प्यार होएगा।

4) *बाबा जी की आशीर्वादों का ज़िक्र हम सारी उम्र भी करते रहें, तो वो हम पूरा नहीं कर पाएंगे, बाबाजी की मेहरबानियों का, बाबाजी की आशीर्वादों का ज़िक्र, पर हम इतना जरूर कर सकते हैं, जैसा जीवन बाबाजी ने हमसे चाहा, वो जीवन हमारा हमेशा बना रहे और हम निरंकार के साथ जुड़े रहें।*

5) अभी भी आपने देखा जब  documentary चल रही थी, जब तक तार जुड़ी रही, तो सब बैठके उसको देख रहे थे और ज्यों ही तार ने अपने आप को अलग किया, सारा कुछ रुक गया।
निरंकार किरपा करे, *हमेशा निरंकार के साथ जुड़के, निरंकार की इच्छा में रहके, जैसे बाबाजी ने चाहा, हम वैसा ही जीवन जी पाएं।*

धन निरंकार जी

Tuesday, November 22, 2016

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (21 Nov,016) | Annual Nirankari Samagam | Day-3


Sadh Sangat Ji Pyar se kehna Dhan Nirankar Ji

1) Aaj Samagam ke antim din savere General Body ki Meeting mein bhi sabne ardaas kari ki *Baba Ji ke vision ko, Baba Ji ki teachings ko hum aage leke jaayein aur jaisa ye Preet-Pyar waala shaher yahaan basa hua hai, isko jagah-2 hum basa paayein.*

2) Aapne abhi geet bhi suna-
  • 'Leke Pyar aaye si, saanu Pyar de gaye,
  • Saadi zindagi nu sona kirdaar de gaye’.
  • He only ‘Lived to Love’
Aur unhone sabko khoob Pyar diya. Par Jis kirdaar ka zikr ho raha hai, vo hum sab bana paayein apna.
3) Aapne Avneet Ji ka bhi zikr suna idhar, Guru Bhakti mein hi usne har rishta nibhaaya.* Usne kabhi aana Delhi toh maine kehna bete Baba Ji ko hug karlo, toh haath jodke neeche jhuk jaata tha aur Baba Ji khud apni baaju uske kandhe pe ya uski peeth pe rakh dete the.

4) Ek bachhe ne kuch panktiyaan likh ke bheji -
  • Aapki dikhlaayi raaho par safar tey hum kar paayein
  • kuch iss tarah sajda-e-ibaadat kar paayein’

*Ardaas karein jaisa Baba Ji ne chaaha, hum sab vaise hi chal paayein.

5) Pichle saal Baba Ji ne Samagam pe kuch panktiyaan boli thi, aap sabko yaad hongi-

‘Zindagi thodi hai har pal mein khush hun,
Kaam mein khush hun araam mein khush hun,
Paneer nahi toh daal mein khush hun,
Gaadi nahi toh paidal hi khush hun,
Aaj dost paas nahi hai toh akele hi khush hun,
Koi naraaz hai toh uski iss ada pe khush hun,
Kal toh beet chukka hai uski meethi yaad mein khush hun,
Kal abhi aaya nahi hai uske intezaar mein khush hun,
Agar ye panktiyaan achhi lagi hon toh jawaab de dena,
Agar jawaab nahi doge tab bhi khush hun.'

6) Baba Ji ka hirdey toh bahut vishaal tha, har haal mein khush rehna jaise unhone sikhaaya hum sab reh paayein

Sadh Sangat Ji Dhan Nirankar