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Tuesday, September 5, 2017

Parvchan His Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (Mukti Parv - 15 Aug, 2017, Delhi)

सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (मुक्ति-पर्व, 15-अगस्त-17, दिल्ली)

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) आज 15 अगस्त 'मुक्ति-पर्व' के मौके पे हम यहां महापुरुषों के वचन सुन रहे हैं और उनसे प्रेरणा ले रहे हैं। आज के दिन जगत माता जी ने अपना शरीर त्यागा। एक प्रीत, प्यार, नम्रता त्याग की वो मूरत थीं, सबको भरपूर प्यार दिया।

2) शहनशाह जी के जीवन से भी हम सब वाकिफ हैं। अनेकों जिंदगियां उन्होंने सवारी और एक भक्ति या भक्त का जीवन कैसे होना चाहिए, वो भी हमें जी के दिखाया। पहले बाबा बूटा सिंह जी के साथ, फिर बाबा गुरबचन सिंह जी के समय एक शिष्य बनकर जी के उन्होंने दिखाया।

3) राजमाता जी के जीवन से तो हम बचपन से ही वाकिफ हैं। शुरू से ही देखते आये उनके अंदर की भक्ति-भावना, सबके लिए प्रीत-प्यार, इज्जत, सत्कार।
बाबाजी ने खुद कहा कि उनकी पूरी Life एक शहनशाह जी वाला मिशन थी। उन्होंने हर रिश्ता बहुत अच्छी तरह से निभाया पर हमेशा गुरु के रिश्ते को पहल दी।

4) हम भी क्या उन पुरातन महापुरुषों की सिखलाईयों  पर चल रहे हैं या इधर-उधर की बातों का असर ग्रहण करके हमारी भक्ति हमारा विश्वास पल में डोल जाता है?
जैसे वो कहते हैं- 'पल में तोला पल में मासा।'

कहीं ऐसा विश्वास तो नहीं है हमारा?
लोगों की बातों में इधर-उधर आके हम संगत से दूर हो जाएं या असर उनकी बातों का ले लें।

लोगों का क्या कहना, हंसो तो वो कहते हैं हंसते क्यों हैं, रोओ तो बोलते हैं ये तो रोते ही रहते हैं, हमने ऐसी बातों में नहीं आना।

5) आपने एक उदाहरण संगत में अनेकों बार सुना कि एक बाप-बेटा थे, उनके पास एक गधा था और उन्होंने कहीं जाना होता है तो बाप बेटे को गधे पर बिठाकर, खुद  रस्सी पकड़कर गधे की, चलना शुरू हो जाता है। उन्हें कोई देखता है तो कहता है- कैसा बेटा है, बाप की उम्र का लिहाज नहीं कर रहा, खुद ऊपर बैठ गया है और बाप को पैदल चला रहा है। यह सुन के बेटा नीचे उतर जाता है और अपने बाप को ऊपर बैठा देता है। थोड़ा ही आगे जाते हैं तो लोग कहते हैं कि- कैसा बाप है, छोटे बेटे को पैदल चला रहा है और खुद ऊपर बैठा है।
जब ये उनको सुनाई देता है तो वह दोनों ही ऊपर बैठ जाते हैं। इतनी देर में कोई और आगे से कह देता है कि जानवर का बिल्कुल लिहाज़ नहीं है इनको, खुद दोनों ऊपर बैठे हैं और उसके ऊपर जानवर पे इतना वज़न डाला हुआ है। वह दोनों ही नीचे उतर जाते हैं और रस्सी पकड़कर आगे चलना शुरु करते हैं तो लोग मजाक उड़ाते हैं कि- देखो जी जानवर है, फिर भी पैदल जा रहे हैं।

6) जो गुरमुख होते हैं, वो ऐसी बातों में नहीं आते, बल्कि हमेशा यही अरदास करते हैं-
'इतना काबू हो तेरा मेरे पे कि,
मैं अगर बुरा चाहूं भी तो किसी का बुरा कर ना पाऊँ।'

और अगर हम लोगों की बातों में आते हैं तो उनको, दूसरों को, नुकसान पहुंचाने के लिए कई बार हम कोशिश करते हैं। तो एकदम बेकल जी की वो लाइनें-
'घर अपना फूंक देते हैं गैरों का मान के,
लेते हैं यूं इंतकाम अपने आप से लोग।'

7) अभी आपने एक वो मछली वाला example बाबाजी से सुना कि- छोटे से दायरे में रहती है, इस करके जब उसको समंदर में डाल देते हैं तब भी वो समुंदर की गहराई का आनंद नहीं लेती।
दूसरी और एक और मछली है उसको समुंदर में जब डाला जाता है तो वो अपनी आजादी का नाजायज़ फायदा उठा लेती है और समुंदर को cross करके आगे बढ़के किनारे पे पहुंच जाती है। जब वो किनारे पे पहुंचती है तो फिर जो उसका नुकसान होता है, उस नुकसान से उसको कोई नहीं बचा पाता।

8) हमने अब देखना है, हम उन पुरातन महापुरुषों की तरह सेवा-सिमरन-सत्संग कर रहे हैं या अपनी किसी convenience के according सत्संग-सेवा-सिमरन करते हैं?
अभी हमने ये भी सुना बाबाजी के प्रवचनों में कि-
'इतनी आज़ादी दे मुझे कि मैं तेरी कैद में रह सकूं।'

9) निरंकार से यही अरदास है कि इसकी कैद में रहके कभी हमारा विश्वास ना डोले, इसकी कैद में रहके हम इस मिशन को आगे से आगे बढ़ा पाएं।

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Parvchan His Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (20 August, 2017, Delhi)

सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (20-अगस्त-17, दिल्ली)

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) कुछ वर्ष पहले बाबा जी ने कवि दरबार में एक समस्या दी थी -
'विश्वास ही इंसान है, विश्वास ही भगवान है।'

बाबाजी ने हमेशा यही समझाया -
'जितना निरंकार पे हमारा विश्वास बढ़ता है, उतने ही हम पूर्ण गुरसिख बन पाते हैं।'

ज्यों-ज्यों हम इसके प्रति समर्पित होते हैं, त्यों-त्यों हमारे अंदर एक Positivity की भावना आती है, Positive हम बनते जाते हैं।

2) आप Nature में ही देख लीजिए। एक Catepillar समर्पित होता है और कितना सुंदर एक तितली का रूप ले लेता है। जब वो एक Cocoon की form में होता है, उसके इर्द-गिर्द सिर्फ अंधेरा होता है, उसको ये नहीं पता होता कि मेरा future क्या है, वो सिर्फ surrender ही करता है।

3) इसी के साथ वो Godfidence वाला word भी ध्यान में आ गया। संत-महापुरुष अपने पे Confidence नहीं, इस निरंकार की Godfidence पे विश्वास रखते हैं क्योंकि  वह जानते हैं इस निरंकार को पता है, हमारी बेहतरी किसमें है, हमारी भलाई किसमें है।

4) कुछ दिन पहले वो lines पढ़ने को मिली कि-
धोखा खाने वाला तो संभल जाता है पर धोखा देने वाला संभल नहीं पाता क्योंकि उसके अंदर एक guilty conscious की feeling रहती है।

5) पर महापुरुष हमेशा समर्पित भाव में ही रहते हैं, इसलिए उनके अंदर एक Peace of Mind होता है।
और ये Peace of Mind निरंकार के साथ पूरी तरह से जुड़ने से ही आता है और वो महापुरुष अपने इस विश्वास और इस Godfidence के साथ हमेशा निरंकार के साथ जुड़े रहते हैं और एक Peaceful जिंदगी व्यतीत कर पाते हैं।

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Parvchan of Satguru Mata Savidner Hardev Ji Maharaj (3 September 2017, Delhi)

सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) कहने को तो इंसान के अंदर जो एक unique quality होनी चाहिए वो है Empathy। मतलब कि दूसरे के दुख-दर्द में काम आना, सहानुभूति देना, उसकी problems समझना, ना कि दुख-दर्द देने वाला बनना। पर आज का इंसान सहानुभूति तो क्या, जानबूझकर वही काम करता है, वही बात करता है जिससे कि दूसरे के लिए problems create हों, उसको तकलीफ पहुंचे।

2) एक वो लाइन कईं बार सुनी-
'हम तो डूबे हैं सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे!'
मतलब खुद तो कोई ठीक काम करना नहीं है, अगर कोई और कर भी रहा होता है, तो उसको वो करने नहीं देना, उसके लिए problems create करना।
यह दुनिया में देखने को मिलता है, ये महापुरुषों वाली बात नहीं है।

3) कहीं पे एक लाइन पढ़ने को मिली-
'Don't create problems in your head, that don't even exist.'
  मतलब कि हम ऐसी कोई बात अपने मन से ना पैदा कर दें जिससे खुद भी अपना मन खराब करें, अपने लिए stress create करें, परेशानी create करें और वो आगे बढ़ा-चढ़ा के लोगों की परेशानियों का कारण बन पाए।

4) निरंकार ने हमें समझ दी है ताकि हम समझदारी से काम कर पाएं। पर हम उस समझ को अपने लिए तो इस्तेमाल नहीं करते बल्कि ओर लोगों को समझाने लग पड़ते हैं। चाहे हमारे अपने अंदर हजार गलतियां क्यों ना हों, अगर किसी दूसरे के अंदर एक भी गलती है और वही गलती अगर हम खुद भी कर रहे हैं, पर उसके ऊपर उंगली उछालने लग पढ़ते हैं उसको समझाने लग पड़ते हैं।

5) बाबा जी से ये उदाहरण हमने अनेकों बार सुना कि -
अगर हमारे पास दो पोटलियां हैं, एक पोटली में दूसरे की गलतियां हैं और दूसरी पोटली में दूसरे की अच्छाइयां है, तो अच्छाई वाली जो पोटली है उसको हमेशा हम अपने आगे रखें और उसकी अच्छाइयों से हम अच्छी बातें सीख पाएं।
और अगर अपनी दो पोटलियां हैं जिसमें एक हमारी गलतियां हैं बुराइयां हैं और दूसरी में हमारी अच्छाइयां हैं तो हम अपनी अच्छाइयों वाली पोटली को हमेशा पीछे रखें और अपनी गलती वाली पोटली को आगे रखें ताकि हम एक-एक करके उस गलती को सँवार पाएं और अपना जीवन भी सुधार पाएं।

6) जो 'Work for a Cause, not for Applause' वाली भावना हमें बाबा जी ने हमेशा सिखाई, निरंकार कृपा करे इस भावना के साथ हम आगे बढ़-चढ़ के सारी दुनिया को सवांर पाएं। अपना जीवन तो सँवारे ही, सारी दुनिया को सवांर पाएं, एक सुधार लेकर आ पाएं और जैसा बाबा जी ने मिशन चाहा, हम वैसा मिशन बना पाएं।

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Wednesday, March 8, 2017

Sant Nirankari Samagam at Visakhapatnam 04 March, 2017 | Satguru Mata Savinder Hardev Singh Ji Maharaj


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (4-मार्च-17, विशाखापट्नम, आंध्र प्रदेश)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी
  1. बाबा जी के साथ Vizag में अनेकों बार आने का मौका मिला। आप महापुरुषों का भरपूर प्यार भी मिलता रहा है हमेशा।
  2. बाबा जी ने हमें हर चीज़ गुरमत वाले नज़रिये से समझाई, इस ज्ञान की नज़र से हमें समझाई।* एक बार चश्मे का उदाहरण देते हुए बाबा जी ने समझाया-

    अगर किसी की नज़र कमजोर होती है तो वह व्यक्ति आँखों के डॉक्टर के पास जाता है। डॉक्टर उसकी आंखों की जांच करके एक नंबर देता है और बोलता है इस नंबर का आप चश्मा लगा लो और वह चश्मा लगाने के बाद उसको जो पहले सब कुछ धुंधला दिख रहा होता है, फिर वही साफ दिखना शुरू हो जाता है।
  3. पर वही व्यक्ति अगर डॉक्टर के पास जाए और डॉक्टर से आंखों की जांच करवा कर चश्मा भी बनवा ले, पर वह चश्मा लगाए ना, तो उसे वैसे ही धुंधला ही नजर आएगा।

    इसमें डॉक्टर या चश्मे का तो कोई दोष नहीं है।

    इसी प्रकार हम सत्संग में आते हैं, महापुरुषों के वचन सुनते हैं और *अगर हम महापुरुषों के वचनों पर अमल करते हैं तो हमारा जीवन ऊंचाइयों की तरफ जाता है। पर अगर हम उन वचनों पर अमल करने के बदले उनको ऐसे ही छोड़ दें, सत्संग में आकर अपनी मनमर्जी करें, तो उस व्यक्ति का जीवन हमेशा गिरावट की तरफ जाएगा।*
  4. इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए बाबा जी ने समझाया -
    कई बार ऐसा होता है कि आंखों में रोशनी ही नहीं होती किसी की, तो वह व्यक्ति चाहे जितना मोटा चश्मा शीशे का लगा ले या जिस मर्जी नंबर का चश्मा लगा ले, उसे कुछ नजर नहीं आएगा।

    इसी प्रकार *हम वेद शास्त्र ग्रंथ तो पढ़ते हैं, पर जब हमें यह ज्ञान रूपी नज़र मिल जाती है, तो वेद ग्रंथ भी हमें और आसानी से इस ज्ञान के मार्ग में गवाही देनी शुरू कर देते हैं।*
  5. हम जब चश्मा लगा लेते हैं तो उसे हमको बार-बार उतार के, अनेकों बार उतार के, साफ भी करना पड़ता है क्योंकि उस पर कई बार हमारे अपने ही गंदे हाथ लग जाते हैं या मिट्टी उड़ रही है तो मिट्टी शीशे पर जम जाती है। तो इसी के लिए *महापुरुषों को सेवा सिमरन सत्संग के साथ इसी प्रकार जोड़ा गया है ताकि महापुरुषों के वचन सुन कर, सेवा सिमरण सत्संग करके, उनका इस ज्ञान पर और अटूट विश्वास पैदा होता जाये।*
    निरंकार कृपा करें कि हर संत के जीवन में इतनी शक्ति हो कि इस ज्ञान के रास्ते पर, इस रोशनी के रास्ते पर वह चलता जाए और इंसानियत के रास्ते पर चलता जाए।
  6. जब हमारी गाड़ियां ग्राउंड की तरफ, इधर समागम की तरफ आ रही थी तो एक लाइन लिखी हुई थी कि -
    *_"Be the change that you want to see in this world."_*

    यह महात्मा गांधी जी की लाइंस हमने बाबा जी से भी अनेकों बार यह लाइन सुनी। संतो ने हमेशा यही हमसे चाहा कि *पहले हम अपना जीवन सँवारे, इंसानियत के रास्ते पर, Humility Love Passion के रास्ते पर, पहले खुद चलें और फिर औरों को चलने के लिए भी प्रेरणा दें।*
    निरंकार हर इंसान का जीवन ऐसा प्रेरणादायक बना दे।

    साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Parvchan His Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (Chennai Nirankari Samagam - 7 March 2017)



*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (7-मार्च-17, चेन्नई, तमिलनाडु)-*
प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी
  1. कहीं पे एक लाइन पढ़ने को मिली थी और शायद दासी ने पहले भी एक बार सत्संग में उसे quote किया कि -
    *_'We make a LIVING by what we GET, but we make a LIFE by what we GIVE.'_*

    सब यही चाहते हैं कि एक comfortable जिंदगी जी पाएं और यह जायज़ भी है। पर *एक comfortable जिंदगी जीने के लिए source of earning भी एक नेक तरीके की हो। कोई बेईमानी वाले तरीके से ना हो* क्योंकि हर व्यक्ति की अपने परिवार के प्रति responsibility बनती है कि उन्हें एक comfortable living दे पाए। पर अक्सर हम देखते हैं *दौलत के पीछे भागते-भागते इंसान अपना नेकी का रास्ता भूलकर, गल्त रास्ते से दौलत कमानी शुरू हो जाता है* और अपने फायदे के लिए दूसरों को कुचल देता है और उनको overtake करके, चाहे कोई बुरे से बुरा तरीका क्यों ना हो, वह अपना लेता है।
  2. लोग अक्सर कहते हैं कि दुनिया खराब है। ये दुनिया में सिर्फ दो-चार लोग तो नहीं है, इसमें हम सब हैं, its a full unit. पर चलो मान लिया दुनिया खराब है, पर *तुम्हें एक अच्छा इंसान होने से कौन रोक रहा है? एक नेकी के रास्ते पे चलने से कौन रोक रहा है? अच्छाईयां करने से कौन रोक रहा है?*
  3. राजमाता जी की वो लाइन्स गीत की आप सब ने सुनी हैं कि *अगर कोई मिरचें भी बेच रहा है, तो उसको बेचने दो, पर हमने तो सिर्फ चीनी का ही व्यापार करना है।*

    और बाबा जी ने भी हमें नेकी के रास्ते पर ही चलना सिखाया और समझाया कि *अगर हमने दुनिया संवारनी है तो पहले हमको खुद को सवारना पड़ेगा।*

    और *ऐसे लोग जो अपनी बातों से नहीं बल्कि अपने कर्मों से दुनिया में सुधार लाते हैं, ऐसे लोगों की बहुत ही कमी है, ऐसे लोगों की बहुत जरूरत है और ये आप सब महापुरुषों ने करना है।*
  4. शहंशाह जी के प्रवचन आप सबने पढ़े होंगे। एक बार उन्होंने फरमाया कि *इस मिशन का एक-एक बच्चा, एक-एक संत ऐसा हो कि अगर उसको कोर्ट में किसी के लिए भी गवाही देनी पड़ जाए, तो जो जज है, वो यह कहने पे मजबूर हो जाए कि -

    *'यह निरंकारी मिशन का बच्चा है, यह कोई गल्त गवाही नहीं देगा और ना ही यह झूठी गवाही देगा।'*
  5. दातार से यही अरदास है कि *हर एक बच्चा इस मिशन का ऐसी नेकी की राह पर चलता जाए और दुनिया के कोने-कोने में, घर-घर में, इस मिशन की आवाज पहुंचा पाए।*

    प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Saturday, March 4, 2017

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (26 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-2


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (26-फरवरी-17, कोलकता समागम, दूसरा दिन)-*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) आज समागम के दूसरे दिन आपने सुबह सेवादल की रैली का रूप देखा और अब आप सत्संग का आनंद ले रहे हैं, अपनी भक्ति का आनंद ले रहे हैं। 
बाबा जी ने हमेशा यही सिखाया -
*_'Spend time to improve yourself but do not waste time to prove it.'_*

*हमें अपना समय अपने आपको सुधारने के लिए जरूर लगाना है, पर ये ना हम सोचें, कि हम लोगों को दिखाएं, देखो जी हम अपने आप को कितना improve कर रहे हैं।*

2) *मीराबाई, भक्त कबीर, प्रहलाद, इन सबके जीवन से आप वाकिफ हैं, उन्होंने सिर्फ भक्ति करी और लोगों को ये कभी नहीं बताया कि मैं ज्ञानवान हूं मैं भक्त हूं।* उनकी भक्ति के कारण ही सब उनके साथ जुड़ते गए और आज तक श्रद्धा से सब उनको याद करते हैं। 

3) दूसरी तरफ रावण जो अभिमानी था, उसको अपनी भक्ति का अभिमान भी था और सिर्फ यही दिखाना चाहता था कि मैं कितना महान हूं। अभी तक हर बरस उसका पुतला जलाते हैं और उसके अभिमान के लिए ही उसको याद किया जाता है।
*अगर हम भक्ति सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि लोग देखें मैं कितना बड़ा भक्त हूं तो वह भक्ति नहीं होती।*

4) आप सब प्रधान जी के जीवन से भी वाकिफ थे कि उन्होंने कितना बरस कोलकाता में लगाया और जगह-जगह जाके इस मिशन का प्रचार किया, तब तो कारें भी नहीं थी मिशन के पास इतनी, कभी ट्रेन पे जाना पड़ा तो वह ट्रेन पर चले गए, बस पे जाना पड़ा तो बस पे चले गए, इतना सरल सा का जीवन था उनका और इसी सरलता के साथ उन्होंने अनेकों को इस मिशन के साथ भी जोड़ा।
निरंकार से यही अरदास है कि *सबके जीवन में सरलता बनी रहे भक्ति बनी रहे और बढ़-चढ़ के इस मिशन का प्रचार आगे से आगे कर पाएं।*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (25 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-1


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (25-फरवरी-17, कोलकता समागम, पहला दिन)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) बाबा जी के साथ North East के अनेकों शहरों और गाँवों में जाने का अक्सर मौका मिलता रहा और आप सब महापुरुषों के दर्शन करके आशीर्वाद लेने का भी मौका मिलता रहा। कोलकता में भी अनेको बार बाबाजी के साथ आए और समागम भी किए, पर *आज इस रूप में पहली बार यहां पे अपनी जमीन पे समागम हो रहा है और आप सब ये सुंदर रूप देख रहे हैं।*

2) शायद 2 या 3 वर्ष पहले जब बाबाजी के साथ इसी ज़मीन पे आने का मौका मिला था तो उसी टाइम शायद इसको खरीदा गया था और बाबाजी ने बड़ी खुशी से फरमाया था कि अब कोलकता में हम अपनी ज़मीन पे समागम कर पाएंगे। *यह सिर्फ और सिर्फ बाबा जी के आशीर्वाद से, बाबा जी की मेहरबानी से, जो आज हम सुंदर दृश्य देख रहे हैं, ये हमें देखने को मिल रहा है। हम बाबा जी के एहसानों का बदला कभी चुका नहीं पाएंगे।*

3) कुछ समय पहले एक बच्चों की किताब में एक कहानी पढ़ने को मिली कि एक बहुत गरीब व्यक्ति था। वो अपनी फरियाद लेके राजा के दरबार में गया और अपना उसने हाल सुनाया। राजा बहुत दयालु था। उसने एलान किया कि इसको 30 सोने के सिक्के रोज़ दिए जाएं। उस व्यक्ति ने राजा के एहसान का शुक्र किया और शुक्र करते-करते अपने घर जाकर अपनी आराम से जिंदगी व्यतीत करने लगा। 
कुछ समय बाद राजा के राज्य में थोड़ी सी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई तो राजा ने ऐलान किया कि अब कुछ देर के लिए दान-पुण्य के सभी काम बंद करने पड़ेंगे। जब उस व्यक्ति को यह पता चला, तो पहले जो राजा का एहसान मानता रहा, पर अब उसकी दी हुई दौलत पे अपना हक समझने लग पड़ा था। तो नाराज़ होके राजा के पास गया और बोलने लगा कि ऐसे कैसे हो सकता है और थोड़ा ऊंचा बोलना शुरू हो गया। तो राजा ने फिर ऐलान किया कि अब इसको कभी 30 सिक्के नहीं दिए जाएंगे। 

4) इंसान की भी हालत कुछ ऐसी है। *प्रभु ने इतना कुछ दिया है हमें, उसका शुक्र करने के बदले हम गिले-शिकवों में पड़ जाते हैं। अगर हमें 10 चीज़ें मिली हैं तो हम उनके लिए शुक्रगुजार नहीं होते बल्कि जो एक चीज नहीं मिली उसके लिए हम प्रभु से गिले-शिकवे करने शुरू हो जाते हैं।*
*_'God Ows us nothing but He Gives us everything.'_*

5) आपने संगत में भी महापुरुषों से सुना-
*_'इक-इक स्वांस इसी का दिया है जो मैं लेता हूं,_*
*_अपना आप जताने को अब और ये क्या एहसान करें'_*
आप महापुरुष सेवा सिमरन सत्संग के हमेशा मौके ढूंढते रहते हैं ताकि हम मानव जाति की सेवा कर पाएं, *हर पल सिमरन करके इस प्रभु को हमेशा याद करते रहें, सत्संग करके इसके गुण-गान गायें, इसका शुक्राना करें, हर पल शुक्राना करें, जितना करें उतना कम है।* यही अरदास है निरंकार किरपा बनाए रखे, *हर इक संत के अंदर शुक्राने का भाव बना रहे, अपनी खुदगर्जी कभी ना आए, मनमुटाव या कोई लालच कभी ना आए।*

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Friday, March 3, 2017

Parvachan of Satguru Mata Savinder Hardev Singh Ji Maharaj (23 February 2017, Guru Puja Diwas, Delhi)



 *सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (23-फरवरी-17, गुरु पूजा दिवस, दिल्ली)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) पिछले 8-9 महीने से हम ज़िक्र कर भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं, बाबाजी के आशीर्वादों का, बाबा जी की शिक्षाओं का, एक अनथक जीवन जो सिर्फ मानवता को समर्पित रहा।अपनी परवाह किए बिना, अपनी भूख प्यास नींद की। 
He wanted to uplift humanity and society through Spirituality.

उन्होंने यही सिखाया *_'नर सेवा ही नारायण पूजा है'_* और यही चाहा कि - 
*_'मानव को मानव हो प्यारा, ईक दूजे का बनें सहारा'_*।

2) आज सुबह भी जाने का मौका मिला, समालखा के पास, 4 गांव जो मिशन ने adopt किए हैं बाबा जी के आशीर्वाद से, सब मिशन की शिक्षाओं का, बाबा जी की शिक्षाओं का, They were very impressed और दिल्ली में भी आपने देखा, हॉस्पिटल भी clean हुआ, *All over India we cleaned 263 Railway Stations.* ये सिर्फ इसलिए हो पा रहा है क्योंकि बाबा जी ने हमको हमेशा यही समझाया कि सब इंसान हमारे अपने हैं, ये सब हमारा परिवार है। सबसे, हमें बाबाजी ने हमें समझाया कि प्यार करना है।

3) कुछ समय पहले भी दासी अवनीत जी की एक बात का जिक्र कर रही थी कि, वो बोल रहे थे कि हम किसी को जानते नहीं है अगर तो हम उसके साथ कैसे प्यार कर सकते हैं। इसका सरल उपाय एक ही है कि हम उसके साथ जुड़ जाएँ जो सारी दुनिया के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका ये सब परिवार है। वो एक निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा, इस निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा और कौन हो सकता है। इसके साथ जुड़े रहेंगे तो सब हमारे अपने ही हमें लगेंगे, सबके लिए हमारे दिल में प्यार होएगा।

4) *बाबा जी की आशीर्वादों का ज़िक्र हम सारी उम्र भी करते रहें, तो वो हम पूरा नहीं कर पाएंगे, बाबाजी की मेहरबानियों का, बाबाजी की आशीर्वादों का ज़िक्र, पर हम इतना जरूर कर सकते हैं, जैसा जीवन बाबाजी ने हमसे चाहा, वो जीवन हमारा हमेशा बना रहे और हम निरंकार के साथ जुड़े रहें।*

5) अभी भी आपने देखा जब  documentary चल रही थी, जब तक तार जुड़ी रही, तो सब बैठके उसको देख रहे थे और ज्यों ही तार ने अपने आप को अलग किया, सारा कुछ रुक गया।
निरंकार किरपा करे, *हमेशा निरंकार के साथ जुड़के, निरंकार की इच्छा में रहके, जैसे बाबाजी ने चाहा, हम वैसा ही जीवन जी पाएं।*

धन निरंकार जी

Tuesday, November 22, 2016

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (21 Nov,016) | Annual Nirankari Samagam | Day-3


Sadh Sangat Ji Pyar se kehna Dhan Nirankar Ji

1) Aaj Samagam ke antim din savere General Body ki Meeting mein bhi sabne ardaas kari ki *Baba Ji ke vision ko, Baba Ji ki teachings ko hum aage leke jaayein aur jaisa ye Preet-Pyar waala shaher yahaan basa hua hai, isko jagah-2 hum basa paayein.*

2) Aapne abhi geet bhi suna-
  • 'Leke Pyar aaye si, saanu Pyar de gaye,
  • Saadi zindagi nu sona kirdaar de gaye’.
  • He only ‘Lived to Love’
Aur unhone sabko khoob Pyar diya. Par Jis kirdaar ka zikr ho raha hai, vo hum sab bana paayein apna.
3) Aapne Avneet Ji ka bhi zikr suna idhar, Guru Bhakti mein hi usne har rishta nibhaaya.* Usne kabhi aana Delhi toh maine kehna bete Baba Ji ko hug karlo, toh haath jodke neeche jhuk jaata tha aur Baba Ji khud apni baaju uske kandhe pe ya uski peeth pe rakh dete the.

4) Ek bachhe ne kuch panktiyaan likh ke bheji -
  • Aapki dikhlaayi raaho par safar tey hum kar paayein
  • kuch iss tarah sajda-e-ibaadat kar paayein’

*Ardaas karein jaisa Baba Ji ne chaaha, hum sab vaise hi chal paayein.

5) Pichle saal Baba Ji ne Samagam pe kuch panktiyaan boli thi, aap sabko yaad hongi-

‘Zindagi thodi hai har pal mein khush hun,
Kaam mein khush hun araam mein khush hun,
Paneer nahi toh daal mein khush hun,
Gaadi nahi toh paidal hi khush hun,
Aaj dost paas nahi hai toh akele hi khush hun,
Koi naraaz hai toh uski iss ada pe khush hun,
Kal toh beet chukka hai uski meethi yaad mein khush hun,
Kal abhi aaya nahi hai uske intezaar mein khush hun,
Agar ye panktiyaan achhi lagi hon toh jawaab de dena,
Agar jawaab nahi doge tab bhi khush hun.'

6) Baba Ji ka hirdey toh bahut vishaal tha, har haal mein khush rehna jaise unhone sikhaaya hum sab reh paayein

Sadh Sangat Ji Dhan Nirankar

Sunday, November 20, 2016

Parvachan Her Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (20 November 2016) Nirankari Sant Samagam, Delhi


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (20- नवंबर-16, वार्षिक समागम, दूसरा दिन, दिल्ली)-* 


साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी
  1. अभी आपने बाबा जी के प्रवचन सुने, पिछले 2 दिन से आप भी इन्ही शिक्षाओ का ज़िक्र कर रहे थे! बाबा जी ने ज्ञान देके हमें समझाया कि निरंकार ही हो सकता है जो कण-2 में मौजूद है, हर जगह है और *निरंकार को पहल देके अगर हम कोई भी कार्ये शुरू करेंगे तो हम कभी कोई ग़लत काम नही करेंगे, ना ही हम किसी का बुरा करेंगे!*
  2. बाबा जी का मक़सद था इंसान को इंसान के साथ जोड़ना, आपस में प्यार बढ़ाना! एक बार बाबा जी ने फ़रमाया – *_‘स्प्रेड थे मेसेज ऑफ दा गॉस्पेल, यूज़ वर्ड्स इफ़ नेसेसरी’!_*
  3. बाबा जी ऐसा जीवन हमसे चाहते थे कि हमारा जीवन ही एक प्रचार हो!* एक बार संगत में एक उदाहरण सुना था एक साबुन की अड्वर्टाइज़्मेंट का कि – 2 औरतें सफेद .साड़ी पहन के जा रही होती हैं तो एकदम एक की नज़र पड़ती है और वो अपने मन में ही सोचती है – ‘इसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद क्यू?’ एंड डॅट्स ए क्वॅस्चन मार्क! ऐसे ही हमारा जीवन भी एक क्वेस्चन मार्क हो! *हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाए कि ये निरंकारी है, इसका जीवन हमारे से इतना अलग क्यू है? इसके पास क्या चीज़ है जो इसको ये अलग बना रही है?* हमारे रोज़ का व्यवहार, अनेको इंसानो पे उसका सही या ग़लत एफेक्ट होता है, सो मेक श्योर दि एफेक्ट ईज़ ए गुड वन!

  4. बाबा जी ने सोसाइटी अप्लिफ़्टमेंट के लिए भी अनेको कार्ये किए - *ट्री प्लॅनटेशन, ब्लड डोनेशन, क्लेअनलिनएस्स ड्राइव्स, रन फॉर वन्नेस, नॅचुरल केलॅमिटीस* में भी हमारा मिशन हमेशा आगे रहा और दुनिया भर में देश में *मिशन को इन चीज़ो के लिए सराहा गया और कई अवॉर्ड्स आंड ऑनर्स मिशन को मिले* आज भी आपने देखा.

  5. काइरोप्रॅकटर्स भी, आपने कल भी उनको सुना आज भी उनको सुना, मिशन की टीचिंग्स से प्रभावित होके कितने बरसो से वो लगातार बॉम्बे समागम दिल्ली समागम पहुँच रहे हैं!
  6. हमारा मिशन अध्यात्मिकता का मिशन है, ब्रह्मज्ञान का मिशन है* और हमने इन्ही बातो को पहल देके *मिशन को आगे बढ़ाना है मिशन की टीचिंग्स को आगे बढ़ाना है!*

    साध संगत जी धन निरंकार

Sunday, October 16, 2016

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (16-Oct-16, Samagam Sewa Inaugration)

Sadh Sangat Ji Pyar se kehna Dhan Nirankar Ji...

1) Over the years Baba Ji ne itna sunder naksha humko, Samagam ki roop-rekha itni khubsurat bana di hai hamaare liye, agar hum uspe amal karein toh vo apne aap hi khoobsurat achhi tarah se saara kuch ho payega...

2) *_Baba Ji kehte the Sewa koi badi ya choti nahi hoti, sewa sirf ‘Sewa-Bhavna’ se hoti hai, usmein ‘main’ (ego) nahi hoti._* Barso-baras Baba Ji khud bhi Uniform pehan ke Sewa karte rahe...

3) Aajkal ke selfish yug mein aap Mahapurush apni chinta apni parwah na karte hue, bas achhi tarah se grounds mein lage hue hain, khoob apne Tan-Mann-Dhan ki Sewa kar rahe hain taaki jo Mahapurush hamaare ghar aa rahe hain, hum unke liye achhi si khoobsurat si vyavastha kar paayein...

4) Nirankar kirpa kare aapko Tan-Man-Dhan ke sukh de tandurusti de aur aap sab bad-chad ke, chaahe bachhe hain chaahe behne hain chaahe jawaan hain, aur _bad-chad ke aage Sewa kar paayein aur Mission ke saath aur dridta se aage badein...

Sadh Sangat Ji Dhan Nirankar

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सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (16-ऑक्टोबर-16, समागम सेवा शुभारंभ)

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी...

1) ओवर द यियर्ज़ बाबा जी ने इतना सुन्दर नक्शा हमको, समागम की रूप-रेखा इतनी खूबसूरत बना दी है हमारे लिए, अगर हम उसपे अमल करें तो वो अपने आप ही एक खूबसूरत अच्छी तरह से सारा कुछ हो पाएगा...

2) बाबा जी कहते थे सेवा कोई बड़ी या छोटी नही होती, सेवा सिर्फ़ 'सेवा भावना' से होती है, उसमें ‘मैं’ (ईगो) नही होती...

बरसो-बरस बाबा जी खुद भी यूनिफॉर्म पहन के सेवा करते रहे...

3) आजकल के सेल्फिश युग में आप महापुरुष अपनी चिंता अपनी परवाह ना करते हुए, बस अच्छी तरह से ग्राउंड्स में लगे हुए हैं, खूब अपने टन-मन-धन की सेवा कर रहे हैं ताकि जो महापुरुष हमारे घर आ रहे हैं, हम उनके लिए अच्छी सी खूबसूरत सी व्यवस्था कर पायें...

4) निरंकार किरपा करे आपको टन-मन-धन के सुख दे तंदुरुस्ती दे और आप सब बढ़-चढ़ के, चाहे बच्चे हैं चाहे बहने हैं चाहे जवान हैं, और *_बढ़-चढ़ के आगे सेवा कर पायें और मिशन के साथ और दृढ़ता से आगे बढ़ें...

साध संगत जी धन निरंकार...

Thursday, October 13, 2016

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (13-Oct-16, Karnal Samagam)


Sadh Sangat Ji Pyar se kehna Dhan Nirankar Ji
  1. Baba Ji ke saath kayi baar aapke paas aane ka mauka mila, aapse aashirwad lene ka mauka mila. Baba Ji ne bhi saari Sangat ko khoob Aashirwad bhi diya Pyar bhi diya. Jaisa Jeevan Baba Ji humse chaahte the, Nirankar ke aage ardaas karein, vaisa hum jee paayein.
  2. Parso hi Dussehra tha aur jagah-jagah Raavan ke putle jalaaye gaye, voh toh humne jala diye, par kya_jo hamaare andar ‘main' (ego) roopi Raavan hai, 'lobh’ roopi Raavan hai, 'abhimaan' roopi Raavan hai, hum usko jala paayein hain?
  3. Saare Santo ne humse yahi umeed rakhi ki hum insaniyat waala jeevan jee paayein. Par aaj ka insaan itna selfish ho gaya hai, itna khudgarz ho gaya hai ki apni selfishness ke liye kuch bhi kar leta hai. Aapne akhbaaro mein bhi pada hoga kayi baar, ki agar koi sadak pe accident hua hota hai toh usko hospital leke jaane ke badle zakhmi insaan ko, uske shareer pe kisi ko sone ka zevar ya koi vaise zevar nazar aata hai toh vo utaar ke usko(insaan ko) vahin chhor aate hain. Kayi baar earthquakes ke time bhi humne dekha hai, udhar zakhmiyo ki madad karne ke badle unke gharo mein choriyaan kar lete hain.
  4. Baba Ji ki 2 linein aapne bhi suni hongi –
    Yeh soch kar qaid kar liya sapere ne saanpo ko,ki aadmi ko dasne ke liye aadmi hi kaafi hai’.
    Baba Ji ne toh sirf insaaniyat sikhaayi hai humko, hum sabka haath pakadke uncha uthaane waale banein naa ki taang kheechke neeche giraane waale banein.
  5. Ek baar Baba Ji ne vichar mein bataaya tha ki _iss duniya ke kisi bhi desh mein, kisi bhi shaher mein, kisi bhi kone mein, agar ek vyakti hai jo insaniyat ke raaste pe chal raha hai, Preet Pyar Namrata ke raaste pe chal raha hai, bhale vo kisi dharm ko na bhi maanta ho, main use dhaarmik kehne ko tayyaar hun.
  6. Hamaara sabka farz banta hai, _hum apne aapko sudhaarein_. Jaise-jaise hum apne aapko sudhaarenge, ye duniya apne aap hi sudhar jaayegi aur ek khoobsurat guldasta, jiski Baba Ji ne humse umeed ki, vaisa ban payegi.

    Sadh Sangat Ji Dhan Nirankar...

Monday, October 10, 2016

Pravachan Her Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj, Sant Samagam mauli jagran, Chandigarh Sunday, 9-10-2016


सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (9-ऑक्टोबर-16,चंडीगड़ समागम)-

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) पिछले 36 वर्षो में बाबा जी और राजमाता जी के साथ आपके पासअनेको बार आने का मौका मिला. आप आज इतनी संख्या में दूर-दूर सेआए हैं क्यूंकी आपके दिलों में बाबा जी के लिए प्यार है. इसी प्रकारबाबा जी ने भी सबको इतना प्यार दिया चाहे वो छोटा सा बच्चा हो याबुज़ुर्ग हो, सबको ऐसे ही लगता था की उसी के साथ बाबा जी सबसेज़्यादा प्यार करते थे !

2) एक शक्कर की बोरी वाला उदाहरण हमनेबाबा जी से सुना कीउसको कही से भी खोलो, उसमें से शक्कर ही निकलती है, इसी प्रकारका जीवन बाबा जी ने हम सबसे चाहा, प्रेम वाला, प्रीत वाला, गुरमतवाला, इंसानियत वाला !

3) अगर हम फसल लगाते हैं, खाद भी अच्छी उसमे डालें, मिट्टी भीअच्छी हो मगर अगर पानी खारा हम डाल दें तो वो फसल को नुकसानपहुँचा देता है! इसी प्रकार अगर हमारे भाव भी अच्छे हों, विचार भीअच्छे हों पर भाषा कड़वी हो तो उससे नुकसान ही पहुँचता है!

4) बाबा जी कहते थे प्रेम की भाषा सबसे प्यारी भाषा है! छोटा साबच्चा भी है जो बोल नही पाता, वो भी समझ लेता है और किसी भी देशमें रहने वाला कोई भी व्यक्ति इस भाषा को समझ लेता है और इसीभाषा की हम सबसे उम्मीद रखी है बाबा जी ने!

5) हवा चलती है, पत्तों का रुख़ हवा की तरफ ही होता है, इसी प्रकारजो हमें बाबा जी ने इतना सिखाया है, हमने सबने मिल-जुल्के उसीतरफ चलना है, अपनी मर्यादायें नही भूलनी, मिशन की सिखलाई नहीभूलनी!

6) दासी अपने लिए भी आपसे अरदास करती है, निरंकार के आगेअरदास करती है, जिस प्रकार बाबा जी आप सबको इतना प्यार दे पाएऔर बाबा जी देते रहे सबको, दासी भी ऐसे ही आपको दे पाए!

7) आपके शहर का ही पैदा हुआ बच्चा अवनीत, भले 2-2.5 बरस हीपरिवार में आया, पर उस बच्चे ने कभी भी कोई रिश्तेदारी का मान नहीदिखाया, हमेशा गुरमत में ही रहा. निरंकार किरपा करे हर घर में ऐसेप्यारे, ऐसे विश्वास वाले, मिशन के साथ जुड़े हुए बच्चे हों!

साध संगत जी धन निरंकार