Wednesday, March 8, 2017

Sant Nirankari Samagam at Visakhapatnam 04 March, 2017 | Satguru Mata Savinder Hardev Singh Ji Maharaj


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (4-मार्च-17, विशाखापट्नम, आंध्र प्रदेश)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी
  1. बाबा जी के साथ Vizag में अनेकों बार आने का मौका मिला। आप महापुरुषों का भरपूर प्यार भी मिलता रहा है हमेशा।
  2. बाबा जी ने हमें हर चीज़ गुरमत वाले नज़रिये से समझाई, इस ज्ञान की नज़र से हमें समझाई।* एक बार चश्मे का उदाहरण देते हुए बाबा जी ने समझाया-

    अगर किसी की नज़र कमजोर होती है तो वह व्यक्ति आँखों के डॉक्टर के पास जाता है। डॉक्टर उसकी आंखों की जांच करके एक नंबर देता है और बोलता है इस नंबर का आप चश्मा लगा लो और वह चश्मा लगाने के बाद उसको जो पहले सब कुछ धुंधला दिख रहा होता है, फिर वही साफ दिखना शुरू हो जाता है।
  3. पर वही व्यक्ति अगर डॉक्टर के पास जाए और डॉक्टर से आंखों की जांच करवा कर चश्मा भी बनवा ले, पर वह चश्मा लगाए ना, तो उसे वैसे ही धुंधला ही नजर आएगा।

    इसमें डॉक्टर या चश्मे का तो कोई दोष नहीं है।

    इसी प्रकार हम सत्संग में आते हैं, महापुरुषों के वचन सुनते हैं और *अगर हम महापुरुषों के वचनों पर अमल करते हैं तो हमारा जीवन ऊंचाइयों की तरफ जाता है। पर अगर हम उन वचनों पर अमल करने के बदले उनको ऐसे ही छोड़ दें, सत्संग में आकर अपनी मनमर्जी करें, तो उस व्यक्ति का जीवन हमेशा गिरावट की तरफ जाएगा।*
  4. इसी उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए बाबा जी ने समझाया -
    कई बार ऐसा होता है कि आंखों में रोशनी ही नहीं होती किसी की, तो वह व्यक्ति चाहे जितना मोटा चश्मा शीशे का लगा ले या जिस मर्जी नंबर का चश्मा लगा ले, उसे कुछ नजर नहीं आएगा।

    इसी प्रकार *हम वेद शास्त्र ग्रंथ तो पढ़ते हैं, पर जब हमें यह ज्ञान रूपी नज़र मिल जाती है, तो वेद ग्रंथ भी हमें और आसानी से इस ज्ञान के मार्ग में गवाही देनी शुरू कर देते हैं।*
  5. हम जब चश्मा लगा लेते हैं तो उसे हमको बार-बार उतार के, अनेकों बार उतार के, साफ भी करना पड़ता है क्योंकि उस पर कई बार हमारे अपने ही गंदे हाथ लग जाते हैं या मिट्टी उड़ रही है तो मिट्टी शीशे पर जम जाती है। तो इसी के लिए *महापुरुषों को सेवा सिमरन सत्संग के साथ इसी प्रकार जोड़ा गया है ताकि महापुरुषों के वचन सुन कर, सेवा सिमरण सत्संग करके, उनका इस ज्ञान पर और अटूट विश्वास पैदा होता जाये।*
    निरंकार कृपा करें कि हर संत के जीवन में इतनी शक्ति हो कि इस ज्ञान के रास्ते पर, इस रोशनी के रास्ते पर वह चलता जाए और इंसानियत के रास्ते पर चलता जाए।
  6. जब हमारी गाड़ियां ग्राउंड की तरफ, इधर समागम की तरफ आ रही थी तो एक लाइन लिखी हुई थी कि -
    *_"Be the change that you want to see in this world."_*

    यह महात्मा गांधी जी की लाइंस हमने बाबा जी से भी अनेकों बार यह लाइन सुनी। संतो ने हमेशा यही हमसे चाहा कि *पहले हम अपना जीवन सँवारे, इंसानियत के रास्ते पर, Humility Love Passion के रास्ते पर, पहले खुद चलें और फिर औरों को चलने के लिए भी प्रेरणा दें।*
    निरंकार हर इंसान का जीवन ऐसा प्रेरणादायक बना दे।

    साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Parvchan His Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (Chennai Nirankari Samagam - 7 March 2017)



*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (7-मार्च-17, चेन्नई, तमिलनाडु)-*
प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी
  1. कहीं पे एक लाइन पढ़ने को मिली थी और शायद दासी ने पहले भी एक बार सत्संग में उसे quote किया कि -
    *_'We make a LIVING by what we GET, but we make a LIFE by what we GIVE.'_*

    सब यही चाहते हैं कि एक comfortable जिंदगी जी पाएं और यह जायज़ भी है। पर *एक comfortable जिंदगी जीने के लिए source of earning भी एक नेक तरीके की हो। कोई बेईमानी वाले तरीके से ना हो* क्योंकि हर व्यक्ति की अपने परिवार के प्रति responsibility बनती है कि उन्हें एक comfortable living दे पाए। पर अक्सर हम देखते हैं *दौलत के पीछे भागते-भागते इंसान अपना नेकी का रास्ता भूलकर, गल्त रास्ते से दौलत कमानी शुरू हो जाता है* और अपने फायदे के लिए दूसरों को कुचल देता है और उनको overtake करके, चाहे कोई बुरे से बुरा तरीका क्यों ना हो, वह अपना लेता है।
  2. लोग अक्सर कहते हैं कि दुनिया खराब है। ये दुनिया में सिर्फ दो-चार लोग तो नहीं है, इसमें हम सब हैं, its a full unit. पर चलो मान लिया दुनिया खराब है, पर *तुम्हें एक अच्छा इंसान होने से कौन रोक रहा है? एक नेकी के रास्ते पे चलने से कौन रोक रहा है? अच्छाईयां करने से कौन रोक रहा है?*
  3. राजमाता जी की वो लाइन्स गीत की आप सब ने सुनी हैं कि *अगर कोई मिरचें भी बेच रहा है, तो उसको बेचने दो, पर हमने तो सिर्फ चीनी का ही व्यापार करना है।*

    और बाबा जी ने भी हमें नेकी के रास्ते पर ही चलना सिखाया और समझाया कि *अगर हमने दुनिया संवारनी है तो पहले हमको खुद को सवारना पड़ेगा।*

    और *ऐसे लोग जो अपनी बातों से नहीं बल्कि अपने कर्मों से दुनिया में सुधार लाते हैं, ऐसे लोगों की बहुत ही कमी है, ऐसे लोगों की बहुत जरूरत है और ये आप सब महापुरुषों ने करना है।*
  4. शहंशाह जी के प्रवचन आप सबने पढ़े होंगे। एक बार उन्होंने फरमाया कि *इस मिशन का एक-एक बच्चा, एक-एक संत ऐसा हो कि अगर उसको कोर्ट में किसी के लिए भी गवाही देनी पड़ जाए, तो जो जज है, वो यह कहने पे मजबूर हो जाए कि -

    *'यह निरंकारी मिशन का बच्चा है, यह कोई गल्त गवाही नहीं देगा और ना ही यह झूठी गवाही देगा।'*
  5. दातार से यही अरदास है कि *हर एक बच्चा इस मिशन का ऐसी नेकी की राह पर चलता जाए और दुनिया के कोने-कोने में, घर-घर में, इस मिशन की आवाज पहुंचा पाए।*

    प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी।

Monday, March 6, 2017

Dil ko Chune wali kahani - Asli Prshansa | Krishan Arjun's Story

दिल को छूने वाली कहानी 
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👏👏👏👏असली प्रशंसा 👏👏
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एक बार कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे, 
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तभी बातों बातों में अर्जुन ने कृष्ण से कहा कि क्यों कर्ण को दानवीर कहा जाता है और उन्हें नहीं। जबकि दान हम भी बहुत करते हैं। 
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यह सुन कर कृष्ण ने दो पर्वतों को सोने में बदल दिया, 
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और अर्जुन से कहा कि वे उनका सारा सोना गाँव वालो के बीच बाट दें । 
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तब अर्जुन गाँव गए और सारे लोगों से कहा कि वे पर्वत के पास जमा हो जाएं क्योंकि वे सोना बांटने जा रहे हैं,
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यह सुन गाँव वालो ने अर्जुन की जय जयकार करनी शुरू कर दी और अर्जुन छाती चौड़ी कर पर्वत की तरफ चल दिए। 
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दो दिन और दो रातों तक अर्जुन ने सोने के पर्वतों को खोदा और सोना गाँव वालो में बांटा । पर पर्वत पर कोई असर नहीं हुआ।
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इसी बीच बहुत से गाँव वाले फिर से कतार में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतज़ार करने लगे। अर्जुन अब थक चुके थे लेकिन अपने अहंकार को नहीं छोड़ रहे थे। 
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उन्होंने कृष्ण से कहा कि अब वे थोड़ा आराम करना चाहते हैं और इसके बिना वे खुदाई नहीं कर सकेंगे । 
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तब कृष्ण ने कर्ण को बुलाया और कहा कि सोने के पर्वतों को इन गाँव वालों के बीच में बाट दें।
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कर्ण ने सारे गाँव वालों को बुलाया और कहा कि ये दोनों सोने के पर्वत उनके ही हैं और वे आ कर सोना प्राप्त कर लें । आैर एेसा कहकर वह वहां से चले गए।। 
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अर्जुन भौंचक्के रह गए और सोचने लगे कि यह ख्याल उनके दिमाग में क्यों नहीं आया। 
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तब कृष्ण मुस्कुराये और अर्जुन से बोले कि तुम्हें सोने से मोह हो गया था
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और तुम गाँव वालो को उतना ही सोना दे रहे थे जितना तुम्हें लगता था कि उन्हें जरुरत है। इसलिए सोने को दान में कितना देना है इसका आकार तुम तय कर रहे थे।
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लेकिन कर्ण ने इस तरह से नहीं सोचा और दान देने के बाद कर्ण वहां से दूर चले गए । वे नहीं चाहते थे कि कोई उनकी प्रशंसा करे और ना ही उन्हें इस बात से कोई फर्क पड़ता था कि कोई उनके पीछे उनके बारे में क्या बोलता है। 
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यह उस व्यक्ति की निशानी है जिसे आत्मज्ञान हासिल हो चुका है। दान देने के बदले में धन्यवाद या बधाई की उम्मीद करना उपहार नहीं सौदा कहलाता है।
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🙏🏻 अत: यदि हम किसी को कुछ दान या सहयोग करना चाहते हैं तो हमें ऐसा बिना किसी उम्मीद या आशा के करना चाहिए ताकि यह हमारा सत्कर्म हो ना कि हमारा अहंकार 😊

Saturday, March 4, 2017

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (26 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-2


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (26-फरवरी-17, कोलकता समागम, दूसरा दिन)-*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) आज समागम के दूसरे दिन आपने सुबह सेवादल की रैली का रूप देखा और अब आप सत्संग का आनंद ले रहे हैं, अपनी भक्ति का आनंद ले रहे हैं। 
बाबा जी ने हमेशा यही सिखाया -
*_'Spend time to improve yourself but do not waste time to prove it.'_*

*हमें अपना समय अपने आपको सुधारने के लिए जरूर लगाना है, पर ये ना हम सोचें, कि हम लोगों को दिखाएं, देखो जी हम अपने आप को कितना improve कर रहे हैं।*

2) *मीराबाई, भक्त कबीर, प्रहलाद, इन सबके जीवन से आप वाकिफ हैं, उन्होंने सिर्फ भक्ति करी और लोगों को ये कभी नहीं बताया कि मैं ज्ञानवान हूं मैं भक्त हूं।* उनकी भक्ति के कारण ही सब उनके साथ जुड़ते गए और आज तक श्रद्धा से सब उनको याद करते हैं। 

3) दूसरी तरफ रावण जो अभिमानी था, उसको अपनी भक्ति का अभिमान भी था और सिर्फ यही दिखाना चाहता था कि मैं कितना महान हूं। अभी तक हर बरस उसका पुतला जलाते हैं और उसके अभिमान के लिए ही उसको याद किया जाता है।
*अगर हम भक्ति सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि लोग देखें मैं कितना बड़ा भक्त हूं तो वह भक्ति नहीं होती।*

4) आप सब प्रधान जी के जीवन से भी वाकिफ थे कि उन्होंने कितना बरस कोलकाता में लगाया और जगह-जगह जाके इस मिशन का प्रचार किया, तब तो कारें भी नहीं थी मिशन के पास इतनी, कभी ट्रेन पे जाना पड़ा तो वह ट्रेन पर चले गए, बस पे जाना पड़ा तो बस पे चले गए, इतना सरल सा का जीवन था उनका और इसी सरलता के साथ उन्होंने अनेकों को इस मिशन के साथ भी जोड़ा।
निरंकार से यही अरदास है कि *सबके जीवन में सरलता बनी रहे भक्ति बनी रहे और बढ़-चढ़ के इस मिशन का प्रचार आगे से आगे कर पाएं।*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (25 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-1


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (25-फरवरी-17, कोलकता समागम, पहला दिन)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) बाबा जी के साथ North East के अनेकों शहरों और गाँवों में जाने का अक्सर मौका मिलता रहा और आप सब महापुरुषों के दर्शन करके आशीर्वाद लेने का भी मौका मिलता रहा। कोलकता में भी अनेको बार बाबाजी के साथ आए और समागम भी किए, पर *आज इस रूप में पहली बार यहां पे अपनी जमीन पे समागम हो रहा है और आप सब ये सुंदर रूप देख रहे हैं।*

2) शायद 2 या 3 वर्ष पहले जब बाबाजी के साथ इसी ज़मीन पे आने का मौका मिला था तो उसी टाइम शायद इसको खरीदा गया था और बाबाजी ने बड़ी खुशी से फरमाया था कि अब कोलकता में हम अपनी ज़मीन पे समागम कर पाएंगे। *यह सिर्फ और सिर्फ बाबा जी के आशीर्वाद से, बाबा जी की मेहरबानी से, जो आज हम सुंदर दृश्य देख रहे हैं, ये हमें देखने को मिल रहा है। हम बाबा जी के एहसानों का बदला कभी चुका नहीं पाएंगे।*

3) कुछ समय पहले एक बच्चों की किताब में एक कहानी पढ़ने को मिली कि एक बहुत गरीब व्यक्ति था। वो अपनी फरियाद लेके राजा के दरबार में गया और अपना उसने हाल सुनाया। राजा बहुत दयालु था। उसने एलान किया कि इसको 30 सोने के सिक्के रोज़ दिए जाएं। उस व्यक्ति ने राजा के एहसान का शुक्र किया और शुक्र करते-करते अपने घर जाकर अपनी आराम से जिंदगी व्यतीत करने लगा। 
कुछ समय बाद राजा के राज्य में थोड़ी सी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई तो राजा ने ऐलान किया कि अब कुछ देर के लिए दान-पुण्य के सभी काम बंद करने पड़ेंगे। जब उस व्यक्ति को यह पता चला, तो पहले जो राजा का एहसान मानता रहा, पर अब उसकी दी हुई दौलत पे अपना हक समझने लग पड़ा था। तो नाराज़ होके राजा के पास गया और बोलने लगा कि ऐसे कैसे हो सकता है और थोड़ा ऊंचा बोलना शुरू हो गया। तो राजा ने फिर ऐलान किया कि अब इसको कभी 30 सिक्के नहीं दिए जाएंगे। 

4) इंसान की भी हालत कुछ ऐसी है। *प्रभु ने इतना कुछ दिया है हमें, उसका शुक्र करने के बदले हम गिले-शिकवों में पड़ जाते हैं। अगर हमें 10 चीज़ें मिली हैं तो हम उनके लिए शुक्रगुजार नहीं होते बल्कि जो एक चीज नहीं मिली उसके लिए हम प्रभु से गिले-शिकवे करने शुरू हो जाते हैं।*
*_'God Ows us nothing but He Gives us everything.'_*

5) आपने संगत में भी महापुरुषों से सुना-
*_'इक-इक स्वांस इसी का दिया है जो मैं लेता हूं,_*
*_अपना आप जताने को अब और ये क्या एहसान करें'_*
आप महापुरुष सेवा सिमरन सत्संग के हमेशा मौके ढूंढते रहते हैं ताकि हम मानव जाति की सेवा कर पाएं, *हर पल सिमरन करके इस प्रभु को हमेशा याद करते रहें, सत्संग करके इसके गुण-गान गायें, इसका शुक्राना करें, हर पल शुक्राना करें, जितना करें उतना कम है।* यही अरदास है निरंकार किरपा बनाए रखे, *हर इक संत के अंदर शुक्राने का भाव बना रहे, अपनी खुदगर्जी कभी ना आए, मनमुटाव या कोई लालच कभी ना आए।*

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Friday, March 3, 2017

Parvachan of Satguru Mata Savinder Hardev Singh Ji Maharaj (23 February 2017, Guru Puja Diwas, Delhi)



 *सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (23-फरवरी-17, गुरु पूजा दिवस, दिल्ली)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) पिछले 8-9 महीने से हम ज़िक्र कर भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं, बाबाजी के आशीर्वादों का, बाबा जी की शिक्षाओं का, एक अनथक जीवन जो सिर्फ मानवता को समर्पित रहा।अपनी परवाह किए बिना, अपनी भूख प्यास नींद की। 
He wanted to uplift humanity and society through Spirituality.

उन्होंने यही सिखाया *_'नर सेवा ही नारायण पूजा है'_* और यही चाहा कि - 
*_'मानव को मानव हो प्यारा, ईक दूजे का बनें सहारा'_*।

2) आज सुबह भी जाने का मौका मिला, समालखा के पास, 4 गांव जो मिशन ने adopt किए हैं बाबा जी के आशीर्वाद से, सब मिशन की शिक्षाओं का, बाबा जी की शिक्षाओं का, They were very impressed और दिल्ली में भी आपने देखा, हॉस्पिटल भी clean हुआ, *All over India we cleaned 263 Railway Stations.* ये सिर्फ इसलिए हो पा रहा है क्योंकि बाबा जी ने हमको हमेशा यही समझाया कि सब इंसान हमारे अपने हैं, ये सब हमारा परिवार है। सबसे, हमें बाबाजी ने हमें समझाया कि प्यार करना है।

3) कुछ समय पहले भी दासी अवनीत जी की एक बात का जिक्र कर रही थी कि, वो बोल रहे थे कि हम किसी को जानते नहीं है अगर तो हम उसके साथ कैसे प्यार कर सकते हैं। इसका सरल उपाय एक ही है कि हम उसके साथ जुड़ जाएँ जो सारी दुनिया के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका ये सब परिवार है। वो एक निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा, इस निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा और कौन हो सकता है। इसके साथ जुड़े रहेंगे तो सब हमारे अपने ही हमें लगेंगे, सबके लिए हमारे दिल में प्यार होएगा।

4) *बाबा जी की आशीर्वादों का ज़िक्र हम सारी उम्र भी करते रहें, तो वो हम पूरा नहीं कर पाएंगे, बाबाजी की मेहरबानियों का, बाबाजी की आशीर्वादों का ज़िक्र, पर हम इतना जरूर कर सकते हैं, जैसा जीवन बाबाजी ने हमसे चाहा, वो जीवन हमारा हमेशा बना रहे और हम निरंकार के साथ जुड़े रहें।*

5) अभी भी आपने देखा जब  documentary चल रही थी, जब तक तार जुड़ी रही, तो सब बैठके उसको देख रहे थे और ज्यों ही तार ने अपने आप को अलग किया, सारा कुछ रुक गया।
निरंकार किरपा करे, *हमेशा निरंकार के साथ जुड़के, निरंकार की इच्छा में रहके, जैसे बाबाजी ने चाहा, हम वैसा ही जीवन जी पाएं।*

धन निरंकार जी