Monday, March 6, 2017

Dil ko Chune wali kahani - Asli Prshansa | Krishan Arjun's Story

दिल को छूने वाली कहानी 
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👏👏👏👏असली प्रशंसा 👏👏
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एक बार कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे, 
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तभी बातों बातों में अर्जुन ने कृष्ण से कहा कि क्यों कर्ण को दानवीर कहा जाता है और उन्हें नहीं। जबकि दान हम भी बहुत करते हैं। 
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यह सुन कर कृष्ण ने दो पर्वतों को सोने में बदल दिया, 
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और अर्जुन से कहा कि वे उनका सारा सोना गाँव वालो के बीच बाट दें । 
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तब अर्जुन गाँव गए और सारे लोगों से कहा कि वे पर्वत के पास जमा हो जाएं क्योंकि वे सोना बांटने जा रहे हैं,
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यह सुन गाँव वालो ने अर्जुन की जय जयकार करनी शुरू कर दी और अर्जुन छाती चौड़ी कर पर्वत की तरफ चल दिए। 
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दो दिन और दो रातों तक अर्जुन ने सोने के पर्वतों को खोदा और सोना गाँव वालो में बांटा । पर पर्वत पर कोई असर नहीं हुआ।
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इसी बीच बहुत से गाँव वाले फिर से कतार में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतज़ार करने लगे। अर्जुन अब थक चुके थे लेकिन अपने अहंकार को नहीं छोड़ रहे थे। 
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उन्होंने कृष्ण से कहा कि अब वे थोड़ा आराम करना चाहते हैं और इसके बिना वे खुदाई नहीं कर सकेंगे । 
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तब कृष्ण ने कर्ण को बुलाया और कहा कि सोने के पर्वतों को इन गाँव वालों के बीच में बाट दें।
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कर्ण ने सारे गाँव वालों को बुलाया और कहा कि ये दोनों सोने के पर्वत उनके ही हैं और वे आ कर सोना प्राप्त कर लें । आैर एेसा कहकर वह वहां से चले गए।। 
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अर्जुन भौंचक्के रह गए और सोचने लगे कि यह ख्याल उनके दिमाग में क्यों नहीं आया। 
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तब कृष्ण मुस्कुराये और अर्जुन से बोले कि तुम्हें सोने से मोह हो गया था
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और तुम गाँव वालो को उतना ही सोना दे रहे थे जितना तुम्हें लगता था कि उन्हें जरुरत है। इसलिए सोने को दान में कितना देना है इसका आकार तुम तय कर रहे थे।
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लेकिन कर्ण ने इस तरह से नहीं सोचा और दान देने के बाद कर्ण वहां से दूर चले गए । वे नहीं चाहते थे कि कोई उनकी प्रशंसा करे और ना ही उन्हें इस बात से कोई फर्क पड़ता था कि कोई उनके पीछे उनके बारे में क्या बोलता है। 
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यह उस व्यक्ति की निशानी है जिसे आत्मज्ञान हासिल हो चुका है। दान देने के बदले में धन्यवाद या बधाई की उम्मीद करना उपहार नहीं सौदा कहलाता है।
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🙏🏻 अत: यदि हम किसी को कुछ दान या सहयोग करना चाहते हैं तो हमें ऐसा बिना किसी उम्मीद या आशा के करना चाहिए ताकि यह हमारा सत्कर्म हो ना कि हमारा अहंकार 😊

Saturday, March 4, 2017

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (26 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-2


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (26-फरवरी-17, कोलकता समागम, दूसरा दिन)-*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) आज समागम के दूसरे दिन आपने सुबह सेवादल की रैली का रूप देखा और अब आप सत्संग का आनंद ले रहे हैं, अपनी भक्ति का आनंद ले रहे हैं। 
बाबा जी ने हमेशा यही सिखाया -
*_'Spend time to improve yourself but do not waste time to prove it.'_*

*हमें अपना समय अपने आपको सुधारने के लिए जरूर लगाना है, पर ये ना हम सोचें, कि हम लोगों को दिखाएं, देखो जी हम अपने आप को कितना improve कर रहे हैं।*

2) *मीराबाई, भक्त कबीर, प्रहलाद, इन सबके जीवन से आप वाकिफ हैं, उन्होंने सिर्फ भक्ति करी और लोगों को ये कभी नहीं बताया कि मैं ज्ञानवान हूं मैं भक्त हूं।* उनकी भक्ति के कारण ही सब उनके साथ जुड़ते गए और आज तक श्रद्धा से सब उनको याद करते हैं। 

3) दूसरी तरफ रावण जो अभिमानी था, उसको अपनी भक्ति का अभिमान भी था और सिर्फ यही दिखाना चाहता था कि मैं कितना महान हूं। अभी तक हर बरस उसका पुतला जलाते हैं और उसके अभिमान के लिए ही उसको याद किया जाता है।
*अगर हम भक्ति सिर्फ इसलिए कर रहे हैं कि लोग देखें मैं कितना बड़ा भक्त हूं तो वह भक्ति नहीं होती।*

4) आप सब प्रधान जी के जीवन से भी वाकिफ थे कि उन्होंने कितना बरस कोलकाता में लगाया और जगह-जगह जाके इस मिशन का प्रचार किया, तब तो कारें भी नहीं थी मिशन के पास इतनी, कभी ट्रेन पे जाना पड़ा तो वह ट्रेन पर चले गए, बस पे जाना पड़ा तो बस पे चले गए, इतना सरल सा का जीवन था उनका और इसी सरलता के साथ उन्होंने अनेकों को इस मिशन के साथ भी जोड़ा।
निरंकार से यही अरदास है कि *सबके जीवन में सरलता बनी रहे भक्ति बनी रहे और बढ़-चढ़ के इस मिशन का प्रचार आगे से आगे कर पाएं।*

प्यारी साध सांगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (25 Feb, 2017) | Kolkata Nirankari Samagam | Day-1


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (25-फरवरी-17, कोलकता समागम, पहला दिन)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) बाबा जी के साथ North East के अनेकों शहरों और गाँवों में जाने का अक्सर मौका मिलता रहा और आप सब महापुरुषों के दर्शन करके आशीर्वाद लेने का भी मौका मिलता रहा। कोलकता में भी अनेको बार बाबाजी के साथ आए और समागम भी किए, पर *आज इस रूप में पहली बार यहां पे अपनी जमीन पे समागम हो रहा है और आप सब ये सुंदर रूप देख रहे हैं।*

2) शायद 2 या 3 वर्ष पहले जब बाबाजी के साथ इसी ज़मीन पे आने का मौका मिला था तो उसी टाइम शायद इसको खरीदा गया था और बाबाजी ने बड़ी खुशी से फरमाया था कि अब कोलकता में हम अपनी ज़मीन पे समागम कर पाएंगे। *यह सिर्फ और सिर्फ बाबा जी के आशीर्वाद से, बाबा जी की मेहरबानी से, जो आज हम सुंदर दृश्य देख रहे हैं, ये हमें देखने को मिल रहा है। हम बाबा जी के एहसानों का बदला कभी चुका नहीं पाएंगे।*

3) कुछ समय पहले एक बच्चों की किताब में एक कहानी पढ़ने को मिली कि एक बहुत गरीब व्यक्ति था। वो अपनी फरियाद लेके राजा के दरबार में गया और अपना उसने हाल सुनाया। राजा बहुत दयालु था। उसने एलान किया कि इसको 30 सोने के सिक्के रोज़ दिए जाएं। उस व्यक्ति ने राजा के एहसान का शुक्र किया और शुक्र करते-करते अपने घर जाकर अपनी आराम से जिंदगी व्यतीत करने लगा। 
कुछ समय बाद राजा के राज्य में थोड़ी सी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई तो राजा ने ऐलान किया कि अब कुछ देर के लिए दान-पुण्य के सभी काम बंद करने पड़ेंगे। जब उस व्यक्ति को यह पता चला, तो पहले जो राजा का एहसान मानता रहा, पर अब उसकी दी हुई दौलत पे अपना हक समझने लग पड़ा था। तो नाराज़ होके राजा के पास गया और बोलने लगा कि ऐसे कैसे हो सकता है और थोड़ा ऊंचा बोलना शुरू हो गया। तो राजा ने फिर ऐलान किया कि अब इसको कभी 30 सिक्के नहीं दिए जाएंगे। 

4) इंसान की भी हालत कुछ ऐसी है। *प्रभु ने इतना कुछ दिया है हमें, उसका शुक्र करने के बदले हम गिले-शिकवों में पड़ जाते हैं। अगर हमें 10 चीज़ें मिली हैं तो हम उनके लिए शुक्रगुजार नहीं होते बल्कि जो एक चीज नहीं मिली उसके लिए हम प्रभु से गिले-शिकवे करने शुरू हो जाते हैं।*
*_'God Ows us nothing but He Gives us everything.'_*

5) आपने संगत में भी महापुरुषों से सुना-
*_'इक-इक स्वांस इसी का दिया है जो मैं लेता हूं,_*
*_अपना आप जताने को अब और ये क्या एहसान करें'_*
आप महापुरुष सेवा सिमरन सत्संग के हमेशा मौके ढूंढते रहते हैं ताकि हम मानव जाति की सेवा कर पाएं, *हर पल सिमरन करके इस प्रभु को हमेशा याद करते रहें, सत्संग करके इसके गुण-गान गायें, इसका शुक्राना करें, हर पल शुक्राना करें, जितना करें उतना कम है।* यही अरदास है निरंकार किरपा बनाए रखे, *हर इक संत के अंदर शुक्राने का भाव बना रहे, अपनी खुदगर्जी कभी ना आए, मनमुटाव या कोई लालच कभी ना आए।*

साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

Friday, March 3, 2017

Parvachan of Satguru Mata Savinder Hardev Singh Ji Maharaj (23 February 2017, Guru Puja Diwas, Delhi)



 *सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (23-फरवरी-17, गुरु पूजा दिवस, दिल्ली)-*

प्यारी साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी

1) पिछले 8-9 महीने से हम ज़िक्र कर भी रहे हैं और सुन भी रहे हैं, बाबाजी के आशीर्वादों का, बाबा जी की शिक्षाओं का, एक अनथक जीवन जो सिर्फ मानवता को समर्पित रहा।अपनी परवाह किए बिना, अपनी भूख प्यास नींद की। 
He wanted to uplift humanity and society through Spirituality.

उन्होंने यही सिखाया *_'नर सेवा ही नारायण पूजा है'_* और यही चाहा कि - 
*_'मानव को मानव हो प्यारा, ईक दूजे का बनें सहारा'_*।

2) आज सुबह भी जाने का मौका मिला, समालखा के पास, 4 गांव जो मिशन ने adopt किए हैं बाबा जी के आशीर्वाद से, सब मिशन की शिक्षाओं का, बाबा जी की शिक्षाओं का, They were very impressed और दिल्ली में भी आपने देखा, हॉस्पिटल भी clean हुआ, *All over India we cleaned 263 Railway Stations.* ये सिर्फ इसलिए हो पा रहा है क्योंकि बाबा जी ने हमको हमेशा यही समझाया कि सब इंसान हमारे अपने हैं, ये सब हमारा परिवार है। सबसे, हमें बाबाजी ने हमें समझाया कि प्यार करना है।

3) कुछ समय पहले भी दासी अवनीत जी की एक बात का जिक्र कर रही थी कि, वो बोल रहे थे कि हम किसी को जानते नहीं है अगर तो हम उसके साथ कैसे प्यार कर सकते हैं। इसका सरल उपाय एक ही है कि हम उसके साथ जुड़ जाएँ जो सारी दुनिया के साथ जुड़ा हुआ है, जिसका ये सब परिवार है। वो एक निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा, इस निरंकार प्रभु परमात्मा के अलावा और कौन हो सकता है। इसके साथ जुड़े रहेंगे तो सब हमारे अपने ही हमें लगेंगे, सबके लिए हमारे दिल में प्यार होएगा।

4) *बाबा जी की आशीर्वादों का ज़िक्र हम सारी उम्र भी करते रहें, तो वो हम पूरा नहीं कर पाएंगे, बाबाजी की मेहरबानियों का, बाबाजी की आशीर्वादों का ज़िक्र, पर हम इतना जरूर कर सकते हैं, जैसा जीवन बाबाजी ने हमसे चाहा, वो जीवन हमारा हमेशा बना रहे और हम निरंकार के साथ जुड़े रहें।*

5) अभी भी आपने देखा जब  documentary चल रही थी, जब तक तार जुड़ी रही, तो सब बैठके उसको देख रहे थे और ज्यों ही तार ने अपने आप को अलग किया, सारा कुछ रुक गया।
निरंकार किरपा करे, *हमेशा निरंकार के साथ जुड़के, निरंकार की इच्छा में रहके, जैसे बाबाजी ने चाहा, हम वैसा ही जीवन जी पाएं।*

धन निरंकार जी

Tuesday, February 28, 2017

Bhakti Story - Hindi Inspirational Spiritual Story


एक भक्त ईश्वर से: 
"मुझे जीवन भर सुखशांति चाहिये।"
ईश्वर ने तुरंत हां कर दी।

भक्त......"मुझे परिवार का भी जिंदगी भर सुख चैन चाहिये"।

ईश्वर ने तुरंत हां कर दी।
फिर
भक्त..."मुझे अपने रिश्तेदारों की भी सलामती चाहिये।"

ईश्ववर ने हां कर दी।

भक्त बहुत प्रसन्न हुआ
कहा .....मुझे मेरे जीवन में कोई दुःख तकलीफ नही चाहिये।

ईश्वर ने तुरंत हामी भर दी।

भक्त बोला... .."आपकी कोई शर्त ?"

ईश्वर हंसे और बोले ..
बस छोटी सी......
रोज सिर्फ एक घंटा
नाम सिमरन...।

भक्त बोला...
मैं ये नही कर सकता.।
ईश्वर बोले
"तेरे एक घंटा नाम सिमरन के बदले मैं 
तुझे तेरे, तेरे परिवार, और रिश्तेदारों को उम्र भर सुख चैन खुशियां देने का वादा करता हूं।"
जिंदगी में तुझे कोई दुख दर्द तकलीफ नही होगी।
तुम हर टेंशन से मुक्त रहोगे।
भक्त बोला...
ना बाबा ना, मैं एक घंटा नाम सिमरन नही कर सकता.
ईश्वर बोले......
एक बार फिर सोच लो।

भक्त.."नहीं होगा।

तब से आज तक ये इंसान दुख दर्द तकलीफें भुगत रहा है।
वो नाम दान तो ले लेता है।
ईश्वर से वादा भी करता है...दावा तक करता है।
पर सिर्फ एक घंटा
नाम सिमरन नही कर सकता।
ईश्वर कहते है...
"यह इंसान भी अजीब है..
ढाई घंटे फिल्म देख सकता  है।
ढाई घंटे डाक्टर के पास जाकर लाईन में बैठ सकता है।
ढाई घंटे योगा तक कर सकता है, अपनी तबियत ठीक करने के लिये।

पूरा पूरा दिन ट्रेन में सफर कर सकता है।
पार्टियों में घंटों टाईम-पास कर सकता है।" 

लेकिन.................

*जो ईश्वर मात्र एक घंटा नाम सिमरन के बदले मनुष्य के हर दुख दर्द तकलीफ संकट बीमारियां तक दूर करने की गारंटी देता हैं।जिंदगी में खुशियां ही खुशियाँ लाने का वादा करता है। उसकी यह छोटी सी शर्त इस इंसान को मंजूर नहीं है।*

शायद...........
इसी वजह से ये इंसान आज, बहुत कुछ, भुगत रहा है।
.....हो सके तो नाम सिमरन
जरुर करें।
अपने लिए अपनी आत्मा के कल्याण के लिए

Tuesday, December 13, 2016

2nd Dr. APJ Abdul Kalam World Peace Award 2016 to be conferred upon Baba Hardev Singh Maharaj



“2nd Dr. APJ Abdul Kalam World Peace Award’2016” to be conferred upon Baba Hardev Singh Maharaj (Posthumously) by All India Council of Human Rights, Liberties and Social Justice, declared By Dr. Anthony raju, Global Chairman on 20nd Nov’2016 at Sant Samagam ,approximately , 5 lacs people was there.

Recognizing the significance of contribution made by His Holiness Nirankari Baba Hardev Singh Ji Maharaj towards emancipation of humanity, love and peace, Dr. Anthony Raju, Global Chairman of All India Council of Human Rights, Liberties and Social Justice declared conferment of ‘Dr.A.P.J.Abdul Kalam World Peace Award’ as a tribute to His Holiness. He invited Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj to receive the same on his behalf at a special function to be organized in December this year.

Delhi, November 21, 2016 : Addressing the second day open session of the on-going 69th Annual Nirankari Sant Samagam here late last evening, Nirankari Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj called upon the devotees to spread the message of Truth, love and peace preached by the Sant Nirankari Mission, through their actions and not mere words.

Satguru Mata Ji reminded the devotees of the oft-repeated words of Baba Hardev Singh Ji Maharaj who said – ‘Spread the message of Gospel and use the words, if necessary’. She said that a Nirankari devotee must appear to be so different from others that people may be compelled to think about their source of inspiration.

Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj said that this Mission is based on the realization of God. Once we know God and adopt the same in practical life, this makes us different from others. Universal love, compassion, tolerance and humility start reflecting from our word and deed. And if we start any action with the realization of God, we shall never do anything wrong or harmful to others.

Satguru Mata Ji referred to the selfless services being rendered by the devotees of the Mission towards humanity across the world. Drives like tree-plantation and cleanliness, blood-donation, Run for Oneness and the rescue and relief measures during natural calamities are attracting the attention of the world towards this Mission. No wonder, the Mission has already received awards and honors for this selfless service rendered with the spirit of devotion and dedication. She declared that we have to continue with such activities for the welfare of humanity.

A team of 70 doctors from abroad have set up their health camp at the Samagam venue for the treatment of chronic orthopaedic patients through chiropractic therapy. Their leader, Dr.Jimmy Nanda, said that they were all motivated by Baba Hardev Singh Ji Maharaj and his message of love and service to humanity.

Tuesday, November 22, 2016

Discourse of Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (21 Nov,016) | Annual Nirankari Samagam | Day-3


Sadh Sangat Ji Pyar se kehna Dhan Nirankar Ji

1) Aaj Samagam ke antim din savere General Body ki Meeting mein bhi sabne ardaas kari ki *Baba Ji ke vision ko, Baba Ji ki teachings ko hum aage leke jaayein aur jaisa ye Preet-Pyar waala shaher yahaan basa hua hai, isko jagah-2 hum basa paayein.*

2) Aapne abhi geet bhi suna-
  • 'Leke Pyar aaye si, saanu Pyar de gaye,
  • Saadi zindagi nu sona kirdaar de gaye’.
  • He only ‘Lived to Love’
Aur unhone sabko khoob Pyar diya. Par Jis kirdaar ka zikr ho raha hai, vo hum sab bana paayein apna.
3) Aapne Avneet Ji ka bhi zikr suna idhar, Guru Bhakti mein hi usne har rishta nibhaaya.* Usne kabhi aana Delhi toh maine kehna bete Baba Ji ko hug karlo, toh haath jodke neeche jhuk jaata tha aur Baba Ji khud apni baaju uske kandhe pe ya uski peeth pe rakh dete the.

4) Ek bachhe ne kuch panktiyaan likh ke bheji -
  • Aapki dikhlaayi raaho par safar tey hum kar paayein
  • kuch iss tarah sajda-e-ibaadat kar paayein’

*Ardaas karein jaisa Baba Ji ne chaaha, hum sab vaise hi chal paayein.

5) Pichle saal Baba Ji ne Samagam pe kuch panktiyaan boli thi, aap sabko yaad hongi-

‘Zindagi thodi hai har pal mein khush hun,
Kaam mein khush hun araam mein khush hun,
Paneer nahi toh daal mein khush hun,
Gaadi nahi toh paidal hi khush hun,
Aaj dost paas nahi hai toh akele hi khush hun,
Koi naraaz hai toh uski iss ada pe khush hun,
Kal toh beet chukka hai uski meethi yaad mein khush hun,
Kal abhi aaya nahi hai uske intezaar mein khush hun,
Agar ye panktiyaan achhi lagi hon toh jawaab de dena,
Agar jawaab nahi doge tab bhi khush hun.'

6) Baba Ji ka hirdey toh bahut vishaal tha, har haal mein khush rehna jaise unhone sikhaaya hum sab reh paayein

Sadh Sangat Ji Dhan Nirankar

Sunday, November 20, 2016

Parvachan Her Holiness Satguru Mata Savinder Hardev Ji Maharaj (20 November 2016) Nirankari Sant Samagam, Delhi


*सतगुरु माता सविंदर हरदेव जी महाराज के प्रवचन (20- नवंबर-16, वार्षिक समागम, दूसरा दिन, दिल्ली)-* 


साध संगत जी प्यार से कहना धन निरंकार जी
  1. अभी आपने बाबा जी के प्रवचन सुने, पिछले 2 दिन से आप भी इन्ही शिक्षाओ का ज़िक्र कर रहे थे! बाबा जी ने ज्ञान देके हमें समझाया कि निरंकार ही हो सकता है जो कण-2 में मौजूद है, हर जगह है और *निरंकार को पहल देके अगर हम कोई भी कार्ये शुरू करेंगे तो हम कभी कोई ग़लत काम नही करेंगे, ना ही हम किसी का बुरा करेंगे!*
  2. बाबा जी का मक़सद था इंसान को इंसान के साथ जोड़ना, आपस में प्यार बढ़ाना! एक बार बाबा जी ने फ़रमाया – *_‘स्प्रेड थे मेसेज ऑफ दा गॉस्पेल, यूज़ वर्ड्स इफ़ नेसेसरी’!_*
  3. बाबा जी ऐसा जीवन हमसे चाहते थे कि हमारा जीवन ही एक प्रचार हो!* एक बार संगत में एक उदाहरण सुना था एक साबुन की अड्वर्टाइज़्मेंट का कि – 2 औरतें सफेद .साड़ी पहन के जा रही होती हैं तो एकदम एक की नज़र पड़ती है और वो अपने मन में ही सोचती है – ‘इसकी साड़ी मेरी साड़ी से सफेद क्यू?’ एंड डॅट्स ए क्वॅस्चन मार्क! ऐसे ही हमारा जीवन भी एक क्वेस्चन मार्क हो! *हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाए कि ये निरंकारी है, इसका जीवन हमारे से इतना अलग क्यू है? इसके पास क्या चीज़ है जो इसको ये अलग बना रही है?* हमारे रोज़ का व्यवहार, अनेको इंसानो पे उसका सही या ग़लत एफेक्ट होता है, सो मेक श्योर दि एफेक्ट ईज़ ए गुड वन!

  4. बाबा जी ने सोसाइटी अप्लिफ़्टमेंट के लिए भी अनेको कार्ये किए - *ट्री प्लॅनटेशन, ब्लड डोनेशन, क्लेअनलिनएस्स ड्राइव्स, रन फॉर वन्नेस, नॅचुरल केलॅमिटीस* में भी हमारा मिशन हमेशा आगे रहा और दुनिया भर में देश में *मिशन को इन चीज़ो के लिए सराहा गया और कई अवॉर्ड्स आंड ऑनर्स मिशन को मिले* आज भी आपने देखा.

  5. काइरोप्रॅकटर्स भी, आपने कल भी उनको सुना आज भी उनको सुना, मिशन की टीचिंग्स से प्रभावित होके कितने बरसो से वो लगातार बॉम्बे समागम दिल्ली समागम पहुँच रहे हैं!
  6. हमारा मिशन अध्यात्मिकता का मिशन है, ब्रह्मज्ञान का मिशन है* और हमने इन्ही बातो को पहल देके *मिशन को आगे बढ़ाना है मिशन की टीचिंग्स को आगे बढ़ाना है!*

    साध संगत जी धन निरंकार